Our Mission

…is to make Bihar a Secure, Environmentally Safe, Healthy and Educated state – a place where poverty will be the thing of the past and the word Bihar will only be spoken as a metaphor for well-being.

समाचारपत्रों से…

सुशील कुमार मोदी की कलम से…

ध्यान भटकाने के लिए फरक्का बराज का मुद्दा उठा रहे हैं सीएम

पटना 24.08.2016 बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत वितरण में अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फरक्का बराज और गाद प्रबंधन नीति का मुद्दा उठा रहे हैं। नई दिल्ली में जल संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के बाद बताया कि फरक्का बराज की वजह से बिहार में बाढ़ आई है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। मुख्यमंत्री बयान देकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान भी बेबुनियाद है कि बिहार सरकार के आग्रह पर फरक्का बराज के गेट खोले गए, हकीकत है कि मानसून के मौसम में बराज के सभी गेट हमेशा खुले रहते हैं।  मुख्यमंत्री स्वयं अभियंता हैं, उन्हें भ्रामक बयान देने के बजाय भारत सरकार की संस्था WAPCOS  की अध्ययन रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए जिसे बिहार सरकार ने ही फरक्का बराज के प्रभाव और गंगा के प्रवाह व गाद आदि के अध्ययन के लिए अधिकृत किया है। भारत सरकार ने भी अप्रैल, 2016 में CEPRS ( Central Water Power Research Station) के डायरेक्टर डा. एम के सिन्हा की अध्यक्षता में गंगा व ब्रह्मपुत्र में कटाव व गाद के अध्ययन के लिए एक समिति का गठन किया है।  फरक्का बराज को तोड़ने का तर्क देने से पहले नीतीश कुमार को एक बार ममता बनर्जी से पूछ लेना चाहिए। फरक्का बराज का निर्माण 1975 में 38 किमी लम्बी फिडर कैनाल के जरिए हुगली में पानी डायवर्ट करने के लिए किया गया था ताकि कलकत्ता बंदरगाह पर आवागमन की सुगमता बनी रहे। दरअसल बराज कोई भंडारण निर्माण (Storage Structure) नहीं है बल्कि इसके जरिए पानी के प्रवाह को डायवर्ट किया जाता है। ऐसे में इस बराज की वजह से बाढ़ आने का... read more

सीएसओ ने आईना दिखाया तो फर्जी आंकड़ों के उत्पादन में जुट गई है सरकार

अब जब सीएसओ ने विकास दर में फिसड्डी होने पर आईना दिखाया है तो राज्य सरकार अपनी नकामियों पर पर्दा डालने के लिए उसे ही आरोपित करते हुए फर्जी आंकड़ों के उत्पादन में लग गई है। केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर बिहार को पहली बार 2015-16 में 12 हजार करोड़ अतिरिक्त प्राप्त हुआ है। केन्द्र पर अनर्गल आरोप लगाने वाली राज्य सरकार बतायें कि क्या इसके पहले किसी एक वर्ष में 3-4 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा अतिरिक्त राशि मिली है? क्या इसी प्रकार विभिन्न योजनाओं में केन्द्र सरकार से सहायक अनुदान के तौर पर राज्य को 19,565 करोड़ रुपये प्राप्त नहीं हुआ है जो राज्य के मूल बजट अनुमान का 107 प्रतिशत और 2012-13 की तुलना में 9 हजार करोड़ रुपये ज्यादा है? वहीं, राज्य सरकार अपने स्रोत से 5 हजार करोड़ रुपये राजस्व संग्रह करने में फिसड्डी क्यों रह गई? 11 मुख्यमंत्रियों की समिति की अनुषंसा पर पूरे देश के लिए नए फंडिंग पैटर्न के कारण अगर बिहार को राज्यांश में 3-4 हजार करोड़ ज्यादा भी खर्च करना पड़ रहा है फिर भी उसे क्या केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर 8 हजार करोड़ रुपये ज्यादा नहीं मिला है? इसी प्रकार पिछले पांच वर्षों में केन्द्र से सूबे के नगर निकायों व पंचायतों को मात्र 5 हजार करोड़ रुपये मिले थे जबकि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पिछले एक वर्ष में ही उससे आधी राशि करीब 2500 करोड़ रुपये दी है। वहीं, राज्य सरकार ने पंचायतों व नगर निकायों को 1000 करोड़ रुपये देने की पंचम राज्य वित आयोग की अनुशंसा के बावजूद एक पैसा भी क्यों नहीं दे पाई? राज्य सरकार बतायें कि... read more
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