Our Mission

…is to make Bihar a Secure, Environmentally Safe, Healthy and Educated state – a place where poverty will be the thing of the past and the word Bihar will only be spoken as a metaphor for well-being.

समाचारपत्रों से…

सुशील कुमार मोदी की कलम से…

पीएमजीएसवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया था कांग्रेस की सरकार ने-सुशील मोदी

देश में पहली बार वाजपेयी सरकार द्वारा 500 से ज्यादा आबादी वाले गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्राम्य सड़क योजना को कांग्रेस की सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। उसने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष 2013-14 में इस योजना के तहत बिहार को मात्र 850 करोड़ रुपये दिया जबकि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने अपने पहले ही वर्ष 2014-15 में इस राशि को करीब दोगुना करते हुए 1,548 करोड़, वहीं दूसरे वर्ष 2015-16 में तीगुनी वृद्धि करते हुए 2,781 करोड़ रुपये दिया और अब 2016-17 में सर्वाधिक 3 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। पीएमजीएसवाई के तहत बनी सड़कों का रखरखाव राज्य सरकार को करना है। बिहार सरकार बतायें कि 2015-16 में 298 करोड़ रुपये उपलब्ध रहने के बावजूद मरम्मति पर मात्र 93 करोड़ रुपये ही क्यों खर्च हुए? यूपीए की सरकार ने कभी भी पीएमजीएसवाई के लिए केन्द्रीय बजट में 9 हजार करोड़ से ज्यादा का प्रावधान नहीं किया मगर नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस बार बजट में 19 हजार करोड़ का प्रावधान किया है जिसकी सर्वाधिक राशि ( करीब 17.5 प्रतिशत ) बिहार को मिलेगी। यूपीए सरकार के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश द्वारा लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख कर 2013-14 में 13 हजार करोड़ की स्वीकृति दिए जाने के बावजूद बिहार को मात्र 850 करोड़ ही मिला था। बिहार सहित देश के सभी राज्यों में पीएमजीएसवाई के तहत 500 की आबादी वाले गांवों को मार्च, 2022 तक पक्की सड़कों से जोड़ने के लक्ष्य को प्रधानमंत्री के निर्देश पर संशोधित कर अब 2019 कर दिया गया... read more

विद्युतिकरण और मुफ़्त कनेक्शन देने में सरकार फेल

मुख्यमंत्री बतायें कि राज्य के 23 हजार 574 गांवों का अभी तक गहन विधुतिकरण क्यों नहीं हो पाया है? 1 करोड़ 49 लाख बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन क्यों नहीं मिल पाया है? दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य ज्योति योजना के तहत कृषि और घरेलू बिजली फीडरों को अलग करने का काम अब तक क्यों नहीं प्रारंभ हो पाया है? घरों में 24 घंटे बिजली देने की योजना का क्या हुआ? ट्रांसफार्मर लागने व एपीएल कनेक्शन के लिए बाहर की कोई पावर कम्पनी बिहार क्यों नहीं आ रही है? अब तक कुल कनेक्शन का मात्र 1 प्रतिशत ही कृषि कार्य के लिए क्यों दिया गया है? बिहार का अपना चैंसा, कजरा और पीरपैंती का बिजली कारखाना कब चालू होगा? केन्द्रीय प्रक्षेत्र की बिजली पर बिहार कब तक निर्भर रहेगा? राज्य के बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन के लिए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार प्रति परिवार 3 हजार रुपये दे रही है मगर राज्य सरकार ऐसा प्रचार कर रही है कि कनेक्शन का खर्च वह खुद उठा रही है। प्रदेश के 1.49 करोड़ परिवारों को आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं दिया जा सका है। पिछले एक साल में मात्र 8 लाख परिवारों को ही बिजली कनेक्शन दिया गया है। क्या इस गति से सभी बीपीएल परिवारों को बिजली कनेक्शन देने में 25 साल नहीं लगेंगे? राज्य के मात्र 53 हजार किसानों के पास ही कृषि कार्य के लिए बिजली का कनेक्शन हैं जो कुल कनेक्शन लेने वालों का मात्र 1 प्रतिशत है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य ज्योति योजना के तहत केन्द्र सरकार द्वारा 5,856 करोड़ रुपये की स्वीकृति दिए जाने के बावजूद कृषि और घरेलू फीडर को अलग करने के... read more
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