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निर्माण कार्यों पर इस साल हो रहा 31 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च
Date : 2020-02-15
संवदेक व संबंधित प्रक्षेत्र के लोगों के साथ मुख्य सचिवालय के सभागार में आयोजित बजट पूर्व बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान निर्माण कार्यों पर 31 हजार 600 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विकास योजनाओं व निर्माण कार्यों में संवेदकों की बड़ी भूमिका है। पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत एस बी डी (स्टैंडर्ड बिडिंग डाॅक्यूमेंट) तैयार करने के लिए एक समिति गठित की गई है। टेंडर में पारदर्शिता के लिए अप्रैल से ई-टेंडरिंग का एक नया माॅड्यूल लागू किया जायेगा। बैठक में भवन निर्माण मंत्री अशोक चैधरी, पीएचईडी मंत्री विनोद नारायण झा व जल संसाधन मंत्री संजय झा भी उपस्थित थे।
श्री मोदी ने कहा कि इस साल सड़क प्रक्षेत्र में 7,023 करोड़, भवन में 4,423 करोड़, जल संसाधन में 2,662.68 करेाड़ व ऊर्जा प्रक्षेत्र में 4,583.13 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। देश में तेजी से विकास कर रहा बिहार में इस साल के 9 महीने में ही 22,146 करोड़ के कच्चा माल बाहर से मंगाए गए हैं। इनमें आयरन व स्टील 10,600 करोड़, सीमेंट 4,279 करोड़, इलेक्ट्रिक सामान 6,572 करोड़, टाइल्स व मार्बल 675 करोड़ के लाए गए हैं। बिहार में सीमेंट की खपत देश में सर्वाधिक है।
अलग-अलग विभागों की जगह अब संवेदक एक ही जगह अपना निबंधन करा सकेंगे। प्राक्कलन तैयार करने के दौरान ही संवेदकों को एक चेकलिस्ट दिया जायेगा जिससे संबंधित कानूनों व क्या-क्या करना है कि उन्हें जानकारी मिल जायेगी।
पथ निर्माण विभाग जिस तरह से तकनीकी निविदा के बाद 7 दिनों तक संवेदकों से जुड़े सारे कागजात पोर्टल पर प्रदर्शित करता है उसी तर्ज पर अन्य विभाग भी करेंगे ताकि किसी भी त्रुट्टि व निविदा रद्द होने की जानकारी मिल सके। सीएफएमएस लागू होने के बाद आॅनलाइन बिल दाखिल करने व भुगतान प्राप्त करने की पारदर्शी व्यवस्था से किसी संवेदक को अब कोषागार जाने की जरूरत नहीं है।
बैठक में अनेक संवेदकों ने जीएसटी व खनन से जुड़ मुद्दे उठाये जिसके आलोक में शीघ्र ही संबंधित लोगों के साथ वर्कशाॅप आयोजित करने का निर्णय लिया गया। संवेदकों ने शिड्यूल आॅफ रेट, कार्य अवधि विस्तार, रिटेंशन मनी की वापसी आदि से जुड़े अनेक मुद्दों पर अपने सुझाव दिए।
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पीएम विशेष पैकेज की 202 करोड़ की राशि से कांवरिया व गांधी परिपथ का विकास
Date : 2020-02-14
मुख्य सचिवालय के सभागार में कला, संस्कृति, खेल व पर्यटन प्रक्षेत्र के लोगों के साथ बजट पूर्व परिचर्चा के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के 202.84 करोड़ की राशि से जैन, कांवरिया व गांधी परिपथ का विकास किया जा रहा है। राजगीर में 740.82 करोड़ की लागत से 90 एकड़ में अन्तरराष्ट्रीय स्पोट्र्स एकेडमी सह क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है जिसका करीब 33 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। बैठक में मंत्री, कला,संस्कृति प्रमोद कुमार व मंत्री, पर्यटन कृष्ण कुमार ऋषिदेव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
श्री मोदी ने कहा कि 145.14 करोड़ की लागत से बोधगया में कल्चरल सेंटर का निर्माण कार्य इस साल मई तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा आईकाॅनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए भारत सरकार द्वारा चयनित देश के 16 पर्यटक स्थलों में बोधगया के महाबोधि मंदिर को भी शामिल किया गया है।
वैशाली से प्राप्त भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष को प्रदर्शित करने के लिए वैशाली में 314.09 करोड़ की लागत से ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ का निर्माण किया जा रहा है। इस संगहालय के केन्द्र में स्तूप व पाश्र्व में में दो बड़ी दीर्घाओं का निर्माण किया जा रहा है। अस्थि अवशेष को मूल रूप में प्रदर्शित करने के साथ ही भगवान बुद्ध के जीवन तथा उनके उपदेशों को विभिन्न माध्यमों के द्वारा प्रदर्शित किया जायेगा। यहां पर पुस्तकालय व मेडिटेशन सेंटर का निर्माण भी किया जा रहा है।
इसके साथ ही पटना संग्रहालय के भवन के उन्नयनीकरण, विस्तारीकरण व नई दीर्घाओं के संयोजन हेतु भवन निर्माण विभाग को 158 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गयी है।
बैठक में चक्षुकला, वाद्यकला, गायन, नाटक, रंगमंच, संग्रहालय, कबड्डी, बाॅस्केटबाॅल, वाॅलीबाॅल, फुटबाॅल, हाॅकी, तैराकी, पैरा ओलम्पिक, कला फोटोग्राफी व पर्यटन प्रक्षेत्र के दो दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने अपने सुझाव दिए। वित्त, कला-संस्कृति व पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव सहित अन्य वरीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
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एक लाख से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं के बाद अब आशा कार्यकर्ताओं को भी स्मार्ट फोन
Date : 2020-02-13
महिला व बाल विकास प्रक्षेत्र के लोगों के साथ बजट पूर्व परिचर्चा के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य की 1 लाख 762 आंगनबाड़ी सेविकाओं के बाद अब सरकार ने सभी आशा कार्यकर्ताओं को भी स्मार्ट फोन देने का निर्णय लिया है। पहले आंगनबाड़ी सेविकाओं को 8.2 कि.ग्रा. के 11 रजिस्टर का संधारण करना पड़ता था जबकि अब वेे स्मार्ट फोन के जरिए डाटा संग्रह कर पूरक पोषाहार, स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा, पोषण व स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण व स्वास्थ्य जांच आदि सेवाएं निबंधित 1.43 करोड़ परिवारों के 1.25 करोड़ बच्चों व गर्भवती महिलाओं को दे रही हैं। बैठक को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया।
श्री मोदी ने कहा कि 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर आंगनबाड़ी केन्द्रों द्वारा दिए जा रहे पूरक पोषाहार पर राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा पहले से किए जा रहे खर्च के अलावा और 664 करोड़ तथा प्रति लाभार्थी 3 रुपये अतिरिक्त मिलेगा।

बाल विवाह एवं दहेज उन्मूलन अभियान के अन्तर्गत राज्य की प्रत्येक पंचायत में पिछले महीने तक 3 किशोरी व एक किशोर के 31,929 समूहों का गठन कर लिया गया है। बाल विवाह को लेकर सर्वाधिक संवेदनशील महादलित टोलों के किशोर-किशोरियों को इस अभियान की कमान सौंपी गई है। बाल विवाह मुक्त पंचायत की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य व पोष्ण में सुधार के लिए पीएफएमएस पोर्टल के जरिए तीन किस्तों में 5 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इसके तहत अब तक 10.20 लाख लाभुकों को लाभान्वित किया गया हैं।
परिवार व अभिभावक विहीन बच्चों के पालन-पोषण के लिए ’परवरिश योजना‘ चलाई जा रही है। इसके तहत 0-18 वर्ष के 12,527 बच्चों को एक हजार रुपया प्रतिमाह की दर से आर्थिक सहायता अनुदान भत्ता दी जा रही है।
परिचर्चा में शामिल महिला हेल्पलाइन, यूनिसेफ, मिलिंडा एंड बिल गेट्स फाउंडेशन,जेंडर रिसोर्स सेंटर, ट्रीपल सी एनजीओ आदि के करीब दो दर्जन प्रतिभागियों ने अपने सुझाव दिए। बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ, समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद, महिला विकास निगम की एमडी श्रीमती एन. विजय लक्ष्मी, जीविका के सीईओ बाला मुरूगन सहित सहित अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।
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प्रतिदिन 19.41 लाख लीटर दूध का संग्रह,मछली उत्पादन में बिहार शीघ्र हो जायेगा आत्मनिर्भर
Date : 2020-02-11
पशुपालन, दूध, मछली, मुर्गी, अंडा उत्पादन, बकरी पालन व गौशाला प्रक्षेत्र के लोगों की सचिवालय सभागार में आयोजित बजट पूर्व परिचर्चा की छठी बैठक में विचार व सुझाव सुनने के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि दूध उत्पादन में बिहार का स्थान देश में छठा है। यहां प्रतिदिन 19.41 लाख लीटर दूध का संग्रह और 15 लाख लीटर की मार्केटिंग हो रही है। प्रतिवर्ष 6.42 लाख मछली उत्पादन के साथ बिहार शीघ्र ही आत्मनिर्भर हो जायेगा। पशुपालन विभाग का बजट विगत 15 वर्षों में 2005-06 के 73.16 करोड़ से बढ़ कर 2019-20 में 953.25 करोड़ हो गया है। बैठक को कृषि व पशुपालन मंत्री डा. प्रेम कुमार ने भी सम्बोधित किया।
श्री मोदी ने कहा कि 12 से 27 फरवरी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत निबंधित 60 लाख किसानों को किसान के्रडिट कार्ड (केसीसी) देने के लिए चलाये जा रहे विशेष अभियान से पशु व मछली पालकों को भी जोड़ा जायेगा। कृषि के साथ पशुपालन प्रक्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में है। अंडा और दूध की खपत बढ़ाने के लिए इसे आंगनबाड़ी और स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना से जोड़ा गया है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की सहायता से पूर्णिया में 50 लाख क्षमता का फ्रोजेन सिमेन स्टेशन तथा राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत गायों के देशी नस्लों के संवर्द्धन हेतु डुमरांव में भ्रूण हस्तांतरण प्रोद्योगिकी परियोजना प्रारंभ की गई है। 2019-20 में एफएमडी बीमारियों की रोकथाम के लिए 3.30 करोड़ तथा एचएस बीक्यू के लिए 1.65 करोड़ पशुओं व 51 लाख भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया गया है।
बैठक में शामिल पशु, मुर्गी व मछली पालक किसानों ने अंडा की कीमत नियंत्रित करने, बाजार उपलब्ध कराने, मछलियों की बीमारी ज्ञात करने के लिए लैब स्थापित करने, मछली बीज व चारा के प्रमाणीकरण आदि के सुझाव दिए। बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ, पशु व मत्स्य संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एन विजय लक्ष्मी सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
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आनलाइन पंजीकृत 1.20 करोड़ किसानों के खाते में दी जा रही है विभिन्न योजनाओं की राशि
Date : 2020-02-10
बजट पूर्व परिचर्चा की पांचवी बैठक में कृषि प्रक्षेत्र से जुड़े किसानों व विभिन्न कृषक संघों के प्रतिनिधियों से उनके सुझाव व विचार सुनने के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि आॅनलाइन पंजीकृत राज्य के 1.20 करोड़ किसानों को विभिन्न योजनाओं की राशि सीधे आधार से जुड़े उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। असामान्य मानसून व प्राकृतिक आपदा से प्रभावित 18.85 लाख किसानों के बैंक खाते में दो वर्षों में 1157.21 करोड़ रुपये की कृषि इनपुट सब्सिडी दिए गए हैं।
श्री मोदी ने कहा कि मौसम के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत अगले 5 वर्षों (2019-20 से 2023-24) के लिए 60.50 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इस साल 8 जिलों गया, नवादा, नालंदा, भागलपुर, बांका, मुंगर, खगड़िया एवं मधुबनी के 40 गांवों मंे सीधे कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में 1,442 एकड़ में मौसम अनुकूल फसल चक्र को अपनाया गया है तथा अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 में इसे सभी जिलों में लागू किया जायेगा।
जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत अगले तीन वर्षों के लिए 155.88 करोड़ का प्रावधान किया गया है। किसानों को जैविक इनपुट के लिए 11,500 रु. प्रति एकड़ की दर से अग्रिम अनुदान दिया जायेगा। इस साल 21,000 एकड़ में जैविक खेती का लक्ष्य है।
नए कृषि यंत्रों को बढ़ावा देने के लिए 81 प्रकार के कृषि सयंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 163.51 करोड़ का प्रावधान किया गया है। फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित यंत्रों पर सामान्य श्रेणी के किसानों को 75 प्रतिशत तथा अत्यंत पिछड़ा, अनुसूचित जाति व जनजाति के किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही बिहार के कृषि यंत्र निर्माताओं द्वारा बनाए गए यंत्रों पर किसानों को 10 प्रतिशत अधिक अनुदान तथा यंत्रों के परीक्षण में लगने वाले शुल्क की शत-प्रतिशत राशि की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
परिचर्चा में शामिल गन्ना, आम, केला, ड्रेगन फ्रूट, स्ट्राबेरी, मशरूम, शहद, पान, दलहन, सब्जी आदि की खेती से जुड़े दो दर्जन से अधिक किसानों व सहकारी समिति के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव व विचार प्रस्तुत किए। बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस सिद्धार्थ, कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार व सचिव एन सरवण सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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देहदानी परिवारों को एक लाख रुपये देकर सम्मानित करेगी दधीचि देहदान समिति
Date : 2020-02-09
‘दधीचि देहदान समिति’  बिहार के 5 देशरत्न मार्ग स्थित आवास पर आयोजित प्रथम राज्यस्तरीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 8.42 करोड़ के लागत से बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में आईबैंक स्थापित हो रहा है। आईजीआईएमएस में अबतक 441 तथा पीएमसीच में 45 नेत्रदान हुआ है। भागलपुर व गया मेडिकल काॅलेज अस्पताल में आई-बैंक स्थापित हो चुका है। शेष बचे सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में 3-4 महीने में आई बैंक प्रारंभ हो जाएगा। समिति के प्रयास से अन्तरज्योति बालिका विद्यालय, कुम्हरार, पटना के 3 नेत्रहीन बच्चियों का सफल नेत्र प्रत्यारोपन हुआ। उन्होंने दधीचि देहदान समिति की ओर से ब्रेनडेथ व्यक्ति का देहदान करने वाले परिवारों को 1 लाख रुपया के साथ सम्मानित करने की घोषणा की।  
श्री मोदी ने कहा कि विज्ञान के तमाम तरक्की के बाद भी कृत्रिम आंख, हृदय, लीवर व किडनी नहीं बनाया जा सकता है। 2018 में देश में 1.51 लाख लोग दुर्घटना में असमय मरे। दुर्घटनाग्रस्त ब्रेनडेथ व्यक्ति का ही अंग प्रत्यारोपन हो सकता है। जीवित व्यक्ति रक्तदान व मृत्यु उपरांत शरीर व नेत्रदान कर हम न केवल दूसरों की जिन्दगी बचा सकते हैं बल्कि स्वयं भी अमरत्व को प्राप्त कर सकते हैं। गीता के माध्यम से उन्होंने बताया कि आत्मा अमर है मगर शरीर तो नश्वर है। फिर इस नश्वर शरीर से मोह और ममत्व कैसा?
हमारी संस्कृति में दान की अदभुत परंपरा रही है। महर्षि दधीचि ने असुरों के संहार हेतु देवताओं को बज्र के लिए अपना शरीर दान किया था। शरणागत कबूतर के रक्षार्थ राजा शिबी ने अपने जांध के मांस को काट कर दिया। दानवीर कर्ण ने कवच-कुंडल, राजा हरिश्चंद्र ने स्वप्न को सच मान कर विश्वामित्र को राजपाट, शिव की अराधना में विष्णु ने अपनी एक आंख निकाल कर अर्पित कर कमलनयन कहलायें।
दधीचि देहदान समिति का शुभारंभ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने की थी। आज इसका विस्तार बिहार के सभी जिले में हो गया है। पीड़ित, दुःखी, जरूरतमंदों की सेवा में तत्पर रहने वाले समाज के सच्चे रहनुमाओं को सम्मानित कर हमें उनके निःस्वार्थ कार्य व सेवा भावना से प्रेरणा मिलेगी।
सम्मेलन को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय, समिति के सचिव विमल जैन, डा. सुभाष प्रसाद, प्रदीप चैरसिया, संजीव यादव, सुनील कुमार पूर्वे, डा. विभूति प्रसन्न सिंह, डा. राजीव सिंह व डा. निलेश मोहन आदि ने सम्बोधित किया। इस मौके पर रक्तदान, अंगदान, समाज सेवा व जनजागरूकता आदि के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले मुकेश हिसारिया, डा. अभिषेक रंजन, प्रदीप केसरी, मीना सिंह, अमित कुमार सोनी, मारूति नंदन, ब्रिजेश कुमार, डा. राखी कुसुमेष, ऋषिकेश सिंह, साधना सिंह, केसरी देवी अग्रवाल, निलेश कुमार वर्मा व कान्ता अग्रवाल को समिति की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख लोगों में विधायक संजीव चैरसिया, सोलिसिटर जेनरल एस डी संजय, विवेक झुनझुनवाला, प्रो. आर के सिन्हा, शैलेश महाजन, विनिता मिश्रा, सुषमा साहू, लाजवंती झा, रविरंजन आदि प्रमुख थे।
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नागरिकता संशोधन कानून का सबसे ज्यादा लाभ दलित समाज को
Date : 2020-02-08
भाजपा प्रदेश कार्यालय में महादलित मोर्चा की ओर से आयोजित ‘संत रविदास जयंती’ समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का सबसे ज्यादा लाभ दलित समाज को मिलने वाला है क्योंकि पाकिस्तान, बग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के शिकार अपनी बहू-बेटियों की इज्जत बचा कर भारत आए शरणार्थियों में दलितों की संख्या सर्वाधिक है। कुछ लोग इसका विरोध करने के साथ दलित-इस्लाम गठजोड़ बनाने की कोशिश कर रहे हंै। अंग्रेजों के काल से यह प्रयास हो रहा है जिसे किसी भी कीमत पर कभी सफल नहीं होने दिया जायेगा। दलित समाज भ्रमित करने वालों से सावधान रहें क्योंकि वे सदियों से हिन्दू समाज के अभिन्न अंग हैं।
श्री मोदी ने कहा कि डा. अम्बेडकर भारत के तो बंगाल के दलित परिवार में जन्में जोगेन्द्र नाथ मंडल पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री बने। मगर पाकिस्तान में दलितों पर होने वाले अत्याचार व भेदभाव से परेशान होकर कुछ वर्षों के बाद ही उन्हें इस्तीफा देकर भारत वापस आना पड़ा। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान में तो दलितों की हालत ज्यादा खराब है। इस्लाम व ईसाइयत कबूल कर लेने के बावजूद दलितों के साथ भेदभाव जारी रहता है। आज धार्मिक भेदभाव व प्रताड़ना के शिकार वैसे ही लोगों को नागरिकता देने के लिए कानून लाया गया है तो दलितों को बरगला कर दिल्ली के शाहीनबाग व अन्य जगहों पर विरोध किया जा रहा है।
डा. अम्बेदकर ने जब कहा कि ‘वे हिन्दू पैदा हुए हैं, मगर हिन्दू रह कर मरेंगे नहीं’ तो उन्हें इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन दिया गया। हैदराबाद के निजाम ने इस्लाम कबूल करने पर उस समय उन्हें 6 करोड़ रुपये देने का वायदा किया। मगर डा. अम्बेदकर ने बौध धर्म को स्वीकार कर गांधी से किया अपना वायदा कि देश के इतिहास व संस्कृति की अक्षुण्ण परम्परा को नुकसान नहीं पहुंचायेंगे, को पूरा किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अम्बेदकर-गांधी की देन दलितों के आरक्षण को और मजबूत और एससी,एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम में 28 और धाराओं को जोड़ कर उसे पहले से सख्त बनाया हैं। 15 साल तक बिहार ऐसी पार्टी की सरकार थी जिसके कार्यकाल में सामूहिक नरसंहार में दलित गाजर-मूली की तरह काटे गए। खुशी की बात है कि 15 वर्षों के एनडीए के शासनकाल में एक भी नरसंहार नहीं होने दिया गया है।
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बकाये 3,483 करोड़ कर राशि के लिए एकमुश्त समाधान योजना
Date : 2020-02-08
बजट पूर्व परिचर्चा की चौथी कड़ी में मुख्य सचिवालय स्थित सभागार में कराधान प्रक्षेत्र के लोगों से विमर्श और उनके सुझाव सुनने के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जीएसटी से पूर्व के विभिन्न स्तर पर लम्बित कर विवाद के 62,383 मामले जिनमें 3,483 करोड़ की राशि निहित के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाई गई हैं। अभी तक 700 करदाताओं ने समाधान के लिए आवेदन दिया है। उन्होंने अपील की कि अधिक से अधिक करदाता 25 मार्च तक विवादित राशि का 35 और ब्याज सहित पेनाल्टी की 10 प्रतिशत राशि जमा कर समाधान योजना का लाभ उठावें।
श्री मोदी ने कहा कि विगत वर्ष 2018-19 में 33,539 करोड़ का राजस्व 5 विभागों द्वारा संग्रह किया गया था। इस साल का संशोधित लक्ष्य 35,690 करोड़ है जिनमें से जनवरी तक 26,883 करोड़ का संग्रह हो चुका है। अगले दो महीने में शेष 8,806 करोड़ का संग्रह करने में सभी सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि जीएसटी के अन्तर्गत करवंचना के मामलों को रोकने के लिए 5,479 निबंधित करदाताओं के परिसर का निरीक्षण किया गया जिनमें 744 का कोई अता-पता नहीं पाया गया। छह महीने तक विवरणी दखिल नहीं करने वाले 37,305 कारोबारियों के निबंधन को रद्द कर दिया गया है।
पिछले 20 महीनों में कुल 21 हजार वाहनों व 425 परिसरों का निरीक्षण कर 103 करोड़ की पेनाल्टी अधिरोपित की गई है। फर्जी कम्पनियों के जरिए 100 कारोबारियों ने 1991.6 करोड़ का माल बाहर से मंगाया जिनमें 426.87 करोड़ का कर निहित है। ऐसे करवंचकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
परिचर्चा में शामिल लोगों ने बिहार में पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ोसी राज्यों के समतुल्य वैट दर करने, बालू का अवैध खनन कर यूपी में ले जाने से रोकने के लिए चेकपोस्ट पर कड़ाई करने, ब्लिडिंग बाईलाॅज अधिसूचित करने, 15 साल पुराने वाहनों के लिए एकमुश्त समधान योजना लाने, सर्किल रेट बिक्री दर से ज्यादा होने तथा ईंट, बालू, परिवहन व निबंधन से जुड़े करीब दो दर्जन से अधिक मुद्दे उठाये और अपने सुझाव दिए।
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पीएम सम्मान योजना के किसानों को केसीसी के लिए 15 दिन का विशेष अभियान
Date : 2020-02-07
राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की 71 वीं त्रैमासिक समीक्षा बैठक के बाद मीडिया को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 12 फरवरी से 15 दिन का विशेष अभियान चला कर पीएम किसान योजना में निबंधित किसानों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) दिया जायेगा। इसके तहत पूर्व के खातों को चालू करने, कर्ज की सीमा बढ़ाने के साथ ही मछली व पशु पालन के लिए भी क्रेडिट कार्ड जारी किए जायेंगे। गौरतलब है कि बिहार के 60 लाख से अधिक किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत निबंधित है जबकि करीब 32 लाख किसानों को ही केसीसी निर्गत किया गया है।
श्री मोदी ने कहा कि वार्षिक साख योजना की उपलब्धि में पिछले तीन वर्षों में करीब 11 प्रतिशत की कमी आई है। 31 दिसम्बर, 2017 तक 66.56 प्रतिशत, 2018 में 57.40 व 2019 दिसम्बर तक की उपलब्धि 54.58 फीसदी है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक कम से कम 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने और वार्षिक साख योजना में पिछड़े बांका, जहानाबाद, नालंदा, मधुबनी आदि 10 जिलों व और वहां की बैंक शाखाओं को चिन्ह्ति कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।
बिहार के कर्जधारकों से समय से कर्ज वापसी की अपील करते हुए कहा कि यहां बैंकों का एनपीए अखिल भारतीय दर 12 प्रतिशत से कम 11.5 प्रतिशत है। स्वयं सहायता समूह को दिए गए करीब 2 हजार करोड़ के ऋण की वापसी दर 98 और 20 प्रतिशत ब्याज दर के बावजूद माइक्रो फिनान्स कम्पनियों की शत प्रतिशत है तो बाकी कर्ज की वसूली बैंक क्यों नहीं कर पाते हैं?
बिहार में बैंकों की ग्रामीण शाखाएं मात्र 3677 हैं। विगत कुछ महीनों में बैंक मित्र (बीसी) के द्वारा संचालित ग्राहक सेवा केन्द्रों की संख्या में 942 की कमी हुई है। एक हजार से अधिक बन चुके पंचायत भवनों में बैंक शाखा खोलें क्योंकि आज भी सैकड़ों पंचायतों में ग्राहक सेवा केन्द्र की सुविधा भी नहीं है। उन्होंने बैंकों को अगले वित्तीय वर्ष में एटीएम, बीसी व नई शाखाओं की संख्या में वृद्धि का विस्तृत ब्यौरा तैयार करने का निर्देश दिया। एसबीआई द्वारा पटना सर्किल में 1500 नई एटीएम लगाने के निर्णय का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि तमाम सरकारी योजनाओं के आवेदन, उसके लिए आवश्यक कागजात, ऋण की स्वीकृति व भुगतान आदि आॅनलाइन होना चाहिए। तकनीक के इस दौर में आखिर कोई व्यक्ति हर काम के लिए बैंक की शाखाओं में क्यों जायेगा?
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15 साल से ज्यादा पुराने सरकारी डीजल वाहनों के परिचालन पर पूरे राज्य में रोक
Date : 2020-02-06
पुराना सचिवालय स्थित सभागार में बजट पूर्व परिचर्चा की तीसरी कड़ी में पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण प्रक्षेत्र से जुड़े लोगों से विमर्श के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 15 साल पुराने सरकारी डीजल वाहनों के परिचालन को पूरे राज्य में प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही पटना एवं इसके आस पास के नगर निकाय क्षेत्रों दानापुर, खगौल एवं फुलवारीशरीफ में 15 वर्षों से जयादा पुराने व्यावसायिक वाहनों के परिचालन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। इन क्षेत्रों में डीजल चालित तिपहिया वाहनों के परिचालन को भी मार्च, 2021 के बाद प्रतिबंधित कर दिया जायेगा।
श्री मोदी ने कहा कि डीजल एवं पेट्रोल चालित तिपहिया वाहनों को सीएनजी में तब्दील करने के लिए 40 हजार रुपये, बैट्री चालित में बदलने के लिए 25 हजार व सीएनजी किट लगाने पर 20 हजार रुपये तक एकमुश्त अनुदान देने का प्रावधान किया गया हैं। पटना में गेल के प्रस्तावित 5 आउटलेट में से तीन से सीएनजी की आपूर्ति प्रारंभ हो गयी है।
प्लास्टिक कैरी बैग राज्य में पहले से ही प्रतिबंधित है। यूएनडीपी (यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम,इंडिया) तथा हिन्दुस्तान कोका-कोला बिवरेजेज प्रा. लि. द्वारा पटना के गर्दनीबाग में 5 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लास्टिक अपशिष्ट प्रोसेसिंग इकाई स्थापित की जा रही है। मेडिकल अपशिष्टों के प्रबंधन के लिए चार सामूहिक उपचार केन्द्र पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर व गया में कार्यरत हैं। इसके अलावा भोजपुर व मधेपुरा में दो और केन्द्र स्थापित किए जायेंगे।
परिवेशीय वायु गुणवत्ता के अनुश्रवण के लिए पटना, मुजफ्फरपुर व गया में पहले से कार्यरत एक-एक के आलावा पटना में 5 तथा हाजीपुर एवं गया में एक-एक केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं। शीघ्र ही मुजफ्फरपुर में एक और नया केन्द्र काम करने लगेगा। उपजाऊ उपरी मृदा के संरक्षण के लिए सभी सरकारी भवनों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जायेगा।
बैठक में यूएनडीपी, गेल, आईओसी, भारत पेट्रोलियम, बुडको, ब्रेडा, प्लास्टिक मैन्युफैक्चर्स व रिसाइकलिंग इंडस्ट्रीज,बीआईए, बिहार चैम्बर आॅफ काॅमर्स व स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डा. ए के घोष, वित्त विभाग के प्रधान सचिव डा. एस सिद्धार्थ, वन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह आदि शामिल थे।
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निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हर संभव मदद करेगी सरकार
Date : 2020-02-03
ज्ञान भवन, पटना में नाबार्ड द्वारा आयोजित राज्य क्रेडिट सेमिनार 2020-21 को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि स्टेट फोकस पेपर 2020-21 में बिहार के प्राथमिक क्षेत्रों के लिए आकलित ऋण क्षमता 1,36,830 करोड़ है। बैंक राज्य में इस लक्ष्य के अनुरूप ऋण वितरण करें। अगली बार से यह भी आकलन करें कि फोकस पेपर के अनुपात में कितना ऋण दिया गया।
देश से निर्यात में बिहार का योगदान 0.50 प्रतिशत है। वर्ष 2017-18 में बिहार से 1,748 करोड़ के 8.74 लाख मैट्रिक टन खाद्य पदार्थों व अन्य वस्तुओं का निर्यात किया गया जो 2018-19 में बढ़कर 9.35 लाख मैट्रिक टन हो गया, जिसका मूल्य लगभग 2025 हजार करोड़ है। इस दौरान बिहार के निर्यात की वृद्धि दर 64.1 प्रतिशत रही। बिहार से हुए कुल निर्यात में बासमति चावल 32 प्रतिशत, मक्का 26.9 व गेहूं 17.2 प्रतिशत रहा। बिहार सरकार भागलपुर के कतरनी चावल, मुजफ्फरपुर की लीची, गया का तिलकुट, सिलाव का खाजा व मधुबनी पेटिंग के निर्यात को बढ़ावा देने के मद्देनजर उसकी ब्रांडिग समेत हरसंभव मदद देने का प्रयास करेगी।
वर्ष 2020-21 में कृषि ऋण वितरण के लिए 52,243 करोड़ के लक्ष्य निर्धारण किया गया है। विगत तीन वर्षों में केसीसी धारक किसानों की संख्या 36.14 लाख से घट कर वर्ष 2018-19 में मात्र 19 लाख 55 हजार रह गयी हैं। बिहार में जब एसएचजी समूह की गरीब महिलाओं की कर्ज वापसी दर 98.5 प्रतिशत और एनबीएफसी कम्पनियों की वसूली दर 99 प्रतिशत है तो फिर बैंक किसानों से ऋण वापसी क्यों नहीं करा पाते हैं?
आर्थिक सुस्ती के वर्तमान दौर में बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज देना होगा। अगर कृषि प्रक्षेत्र में कर्ज प्रवाह नहीं बढ़ेगा तो बिहार का अपेक्षित विकास संभव नहीं होगा। मछली उत्पादन के क्षेत्र में बिहार आत्मनिर्भरता के करीब पहुंच गया है। यह गैप अब केवल 40 हजार मैट्रिक टन बच गया है। चालू वित्तीय वर्ष के अंदर ही बाहर से मछली आयात करने की आवश्यकता नहीं होगी। फिशरीज और डेयरी जैसे अपार संभावना वाले कोर सेक्टर में बैंकों को ऋण प्रवाह में तेजी लाने की जरूरत है।
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53 करोड़ की लागत से पाटलिपुत्र टेक्नोलाॅजी पार्क का शीघ्र होगा विस्तार
Date : 2020-02-03
पुराना सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित बजट पूर्व परिचर्चा की दूसरी बैठक में सूचना प्राद्यौगिकी प्रक्षेत्र से जुड़े लोगों से विमर्श के बाद उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भारत सरकार के सहयोग से 53 करोड़ की लागत से पाटलिपुत्रा स्थित साॅफ्टवेयर टेक्नोलाॅजी पार्क आॅफ इंडिया (एसटीपीआई) के विस्तार का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने वाला है। इसके अलावा बिहटा में 58 एकड़ में आईटी पार्क और पटना के डाकबंगला चैराहा के पास आईटी टाॅवर के लिए जमीन चिन्ह्ति किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि दरभंगा और भागलपुर मे दो-दो एकड़ में 10-10 हजार वर्गफीट में एसटीपीआई का निर्माण शीघ्र प्रारंभ होगा। बिहटा में नइलेट के 15 एकड़ के परिसर में जहां प्रशिक्षण कार्य चल रहा है, वहीं नई टेक्नोलाॅजी के और भी कोर्सेस शुरू किए जायेंगे। इसके अलावा बक्सर और मुजफ्फरपुर में एक-एक एकड़ में एक हजार प्रक्षिणार्थियों की क्षमता का टेक्नोलाॅजी व साॅफ्टवेयर प्रशिक्षण के लिए नाइलेट केन्द्र का निर्माण प्रस्तावित है।
भविष्य की तकनीक को ध्यान में रख कर नाइलेट केन्द्र को ही एडवांस ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पटना के बिस्कोमान टाॅवर में भी साॅफ्टवेयर डेवलपर के लिए आॅफिस की जगह उपलब्ध है।
परिचर्चा में आईआईटी, बीआईटी, एनआईटी व नाइलेट के अलावा साॅफ्टवेयर व हार्डवेयर, स्टार्टअप, काॅल सेंटर, स्किल डेवलपमेंट, काॅमन सर्विस सेंटर व टेली मेडिसीन आदि के क्षेत्र में टेक्नोलाॅजी के जरिए काम करने वाले करीब दो दर्जन से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए। बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ और आईटी सचिव राहुल सिंह के अलावा अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।
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आपदा प्रबंधन व नगर निकायों की अनुदान राशि में तीन गुना वृद्धि
Date : 2020-02-02
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि केन्द्रीय बजट 2020-21 में 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर बिहार के लिए आपदा प्रबंधन व स्थानीय निकायों की अनुदान राशि में तीन गुना तक की वृद्धि का प्रावधान किया गया है। 2019-20 में जहां आपदा प्रबंधन मद में 569.50 करोड़ का प्रावधान था वहीं वह 2020-21 में बढ़ कर 1,888 करोड़ तथा नगर निकायों की प्रावधानित राशि 818.90 करोड़ से बढ़ कर 2,416 करोड़ हो गयी है। पहली बार पंचायती राज को प्राप्त होने वाली 5,018 करोड़ की राशि तीनों संस्थाओं जिला परिषद, प्रखंड समिति व ग्राम पंचायतों को प्राप्त होगी।
राज्य के नगर निकायों के लिए वर्ष 2019-20 में 818.90 करोड़ का प्रावधान था जिसे 2020-21 में 1597.1 करोड़ की बढ़ोत्तरी करते हुए करीब तीन गुना यानी 2,416 कर दिया गया है। इनमें से पटना नगर निकाय को 408 करोड़ प्राप्त होगी जिसकी आधी राशि वायु की गुणवत्ता के सुधार पर तथा शेष आधी राशि पेयजल व ठोस कचरा प्रबंधन पर खर्च किए जायेंगे। राज्य के अन्य स्थानीय निकायों को 2,008 करोड़ मिलेंगे।
श्री मोदी ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए 2020-21 में मिलने वाली 1,888 करोड़ में से पहली बार केन्द्र सरकार ने 80 प्रतिशत राशि आपदा का मुकाबला व 20 फीसदी उसे रोकने (डपजपहंजपवद) के कार्य पर खर्च करने का प्रावधान किया है। इसके अलावा बिहार के सूखा प्रभावित जिलों की योजनाओं को बनाने के लिए 20 करोड़ मिलेगा तथा अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए केन्द्र द्वारा बनाए गए फंड का लाभ भी बिहार को होगा।
पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाली 50 फीसदी राशि असम्बद्ध होगी जिसे अपनी योजना के अनुसार तीनों संस्थाएं खर्च कर पायेंगी जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि स्वच्छता व पेयजल से जुड़ी योजनाओं पर खर्च होंगी।
2020-21 के बजट में पहली बार बिहार के आंगनबाड़ी केन्द्रों को केन्द्र से अतिरिक्त पोषाहार के लिए प्राप्त राशि के अलावा 664 करोड़ प्राप्त होंगे ताकि कुपोषण को कम किया जा सके।
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केन्द्रीय बजट रोजगार सृजन, आमदनी बढ़ाने व मंदी का मुकाबला करने वाला
Date : 2020-02-01
केन्द्रीय बजट 2020-21 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वितमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इससे रोजगार सृजन, आम लोगों की आमदनी बढ़ाने में जहां मदद मिलेगी वहीं बेहत्तर तरीके से मंदी का मुकाबला भी हो सकेगा। इसके साथ ही इस बजट से 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर केन्द्रीय करों में पिछले वर्ष की तुलना में बिहार की हिस्सेदारी में 15 हजार करोड़ की वृद्धि होगी।
श्री मोदी ने कहा कि एन के सिंह की अध्यक्षता वाले 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा को 2020-21 के बजट में शामिल करने के परिणामस्वरूप केन्द्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी .396 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2019-20 की 9.665 प्रतिशत की तुलना में बढ़ कर 2020-21 में 10.061 प्रतिशत हो गई है। इसके परिणामस्वरूप पिछले साल जहां केन्द्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी के तौर पर 63,406 करोड़ का प्रावधान था वहीं इस साल बिहार का हिस्सा 15 हजार करोड़ की वृद्धि के साथ 78,896 करोड़ होगा।
प्रधानमंत्री और 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह को धन्यवाद देते हुए कहा है कि 14 वें वित्त आयोग ने जहां केवल ग्राम पंचायतों के लिए अनुदान का प्रावधान किया था वहीं 2020-21 के बजट में पंचायती राज की त्रितरीय संस्थाओं ग्राम पंचायत, प्रखंड समिति और जिला परिषद के लिए अनुदान के प्रावधान से बिहार जैसे राज्य को काफी लाभ मिलेगा। वित्त आयोग की अनुशंसा पर बजट में ग्राम पंचायती राज के लिए 5018 करोड़, नगर निकायों के लिए 2416 करोड़ व आपदा प्रबंधन केलिए 1888 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
पूरे देश में पिछले वर्ष की तुलना में 20-21 में पंचायती राज संस्थाओं के बजट में 11 हजार करोड़, नगर निकायों के लिए 4500 करोड़ और आपदा प्रबंधन अनुदान में 10062 करोड़ की वृद्धि का सर्वाधिक लाभ बिहार जैसे राज्य को मिलेगा।
बजट में आयकर केा सरलीकरण, लघु एवं मध्यम उद्योगों, आवासीय व कृषि प्रक्षेत्रों के लिए जो अनेक प्रावधान किए गए हैं उससे जहां रोजगार का सृजन होगा, लोगों की आमदनी बढ़ेगी, लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा आएगा, बचत होगी जिससे आर्थिक सुस्ती का बेहत्तर तरीके से मुकाबला संभव होगा।
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काष्ठ आधारित उद्योगों के विनियमन के लिए नया विधेयक लायेगी सरकार
Date : 2020-01-31
मुख्य सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित 2020-21 की बजट पूर्व परिचर्चा की पहली बैठक में वन, वानिकी एवं पर्यावरणीय प्रक्षेत्र से जुड़े करीब दो दर्जन से अधिक लोगों के सुझाव सुनने के बाद उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि विधान मंडल के आगामी सत्र में काष्ठ आधारित उद्योगों को विनियमित करने के लिए सरकार एक नया विधेयक ला रही है। अन्य उद्योगों की तरह काष्ठ उद्योग स्थापित करने वालों को भी रियायत देने पर विचार किया जा रहा है। 2005-06 में वन विभाग का बजट जहां मात्र 50 करोड़ था वहीं 2019-20 में 911 करोड़ हो गया है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अगले 3 साल में वन विभाग की ओर से 2,756 करोड़ खर्च किए जायेंगे एवं 7.70 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य है।
श्री मोदी ने कहा कि कृषि वानिकी के तहत 2012-18 के बीच बिहार में पोपुलर व अन्य प्रजातियों के 8.46 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। पोपुलर के परिपक्व पेड़ों को खरीद कर दूसरे राज्यों में ले जाने वालों को सरकार आवश्यक सहूलियत देगी। बिहार में जैव विविधता बोर्ड के साथ ही विगत साल 27 दिसम्बर को 5 हजार से ज्यादों पंचायतों में उसकी प्रबंधन समिति गठित कर ली गयी है। विकास परियोजनओं के दौरान पेड़ों की कम से कम कटाई हो, दूसरी जगहों पर उखाड़ कर लगाया जाए, इसके लिए सरकार ने एक नीति बनाई है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस साल पृथ्वी दिवस (9 अगस्त) के दिन 2.51 करोड़ पौधारोपण किया जायेगा। इसके लिए 1,794 सरकारी नर्सरी में 4.69 करोड़ पौधे तैयार किए जा रहे हैं। हर पंचायत में 2,200 पौधा लगाने की अभी से ही व्यापक तैयारी की जा रही है।
नर्सरी संचालकों को बाहर भेजकर तथा किसानों को पौधारोपण की प्रशिक्षण देने, स्थानीय निजी नर्सरी से पौधों की खरीद व बांस की खेती को बढ़ावा देने के सुझाव पर सरकार विचार करेगी। कृषि वानिकी के तहत किसानों को पौधे मुफ्त में नहीं बल्कि 10 रुपया प्रति पौधा सुरक्षा निधि लेकर दिया जायेगा और तीन साल बाद सुरक्षा निधि के अतिरिक्त पौधे की जीविता के आधार पर उन्हें 60 रुपये दिए जायेंगे।
परिचर्चा में काष्ठ आधारित उद्योग, नर्सरी, कृषि वानिकी, ,ईको टूरिज्म, पर्यावरण, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण व स्वयं सेवी संस्थाओं से जुड़े करीब 50 प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव व विचार साझा किए। वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ व वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग के दीपक कुमार सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
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बजट 2020-21 पेश करने से पूर्व दस समूहों से होगी परिचर्चा
Date : 2020-01-30
उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि बिहार बजट 2020-21 पेश करने से पहले 31 जनवरी से 15 फरवरी के बीच 10 वर्ग समूहों से परिचर्चा कर बजट के संबंध में उनकी अपेक्षाएं व सुझाव जाने जायेंगे। बजट पूर्व परिचर्चा की यह परिपाटी विगत 2006 से ही जारी है। इस साल पहली बार इसमें 10 समूहों को शामिल किया गया है। 24 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और 25 फरवरी को बजट पेश किया जायेगा।
श्री मोदी ने बताया इसके अलावा अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कर आम लोगों से बजट 2020-21 के लिए 10 फरवरी तक उनके सुझाव भी आमंत्रित किए गए है। बजट पूर्व पहली बैठक 31 जनवरी को मुख्य सचिवालय स्थित सभागार में वन, वानिकी एवं पर्यावरणीय प्रक्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ आयोजित की गई है। उसके बाद आगामी 15 फरवरी तक 9 बैठकों के जरिए सूचना एवं प्रावैधिकी, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण, करारोपण, कृषि एवं संबंधित प्रक्षेत्र, पशुपालन एवं संबंधित प्रक्षेत्र, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, कला,संस्कृति, खेल एवं पर्यटन तथा संवेदक से संबंधित प्रक्षेत्र के साथ विमर्श किए जायेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 का बजट 2 लाख 1 हजार करोड़ से ज्यादा का था। इस बार के बजट को आम लोगों व विभिन्न क्षेत्रों के स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त सुझाव व उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार कर राज्य के सभी क्षेत्रों के समेकित विकास को गति दी जायेगी।
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अपमानित करने वालों को सबक सिखायेंगे पूर्वांचलवासी
Date : 2020-01-30
दिल्ली के करीब एक दर्जन विधान सभा क्षेत्रों में एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्वांचल के मतदाताओं को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी बिहारियों सहित तमाम पूर्वांचलियों को बोझ समझती है। पूर्वाचल वासियों को जलील-अपमानित करने वाले केजरीवाल और उनकी पार्टी को इस बार सबक सिखाएं।
पिछले दो दिनों में दिल्ली के संगम विहार, बदरपुर, तुगलकाबाद, माॅडल टाउन व वजीरपुर आदि विधान सभा क्षेत्रों के एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर आयोजित अपने चुनावी सभाओं में श्री मोदी ने कहा कि जिस तरह से बिहार सहित अनेक राज्यों व केन्द्र में एक गठबंधन की सरकार है उसी प्रकार दिल्ली के मतदाता नरेन्द्र मोदी से लड़ने वाली नहीं बल्कि सहयोग कर विकास को गति देने वाली सरकार बनाएं। केजरीवाल जो 5 साल में नहीं कर पाएं हैं उससे कहीं ज्यादा एनडीए सरकार एक साल में करके दिखायेगी।
उन्होंने कहा कि पूर्वाचल वासियों को अपमानित करने के लिए ही अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि ‘बिहार-यूपी के लोग महज 500 का ट्रेन टिकट लेकर दिल्ली में आकर 5 लाख का मुफ्त इलाज करा लेते हैं।’ 2015 में चुनाव जीतने के लिए केजरीवाल ने जितने भी वायदे किए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं कर पाए। एक बार फिर वे पूर्वांचल वासियों को झांसा देकर सत्ता हासिल करने की उनकी चाल सफल नहीं होने वाली है।
सम्प्रति बिहार में जदयू-भाजपा की सरकार ने जिस तरह से विकास व अमन-चैन कायम किया है, उसी का नतीजा है कि आज लाखों बिहारी इत्मीनान से दिल्ली में नौकरी व अन्य कारोबार कर रहे हैं। दिल्ली के विकास में पूर्वांचल वासियों के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता है। दिल्ली का माहौल अभी से यह साफ संकेत दे रहा है कि यहां के लोग केजरीवाल के झूठे वायदे, व काम न करने की विफलता को छुपाने के लिए किए जा रहे बहाने को अच्छी तरह से समझ चुके हैं।
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बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में हो बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार
Date : 2020-01-29
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक और पत्र लिख कर बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने, सभी ग्राम पंचायतों को बैंक शाखाओं से जोड़ने, सभी बैंक शाखाओं व खास कर गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराने, बैंकिंग काॅरेसपोंडेंट (बीसी) केन्द्रों पर उपभोक्ताओं को पासबुक प्रिंटिंग की सुविधा देने, बीसी की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नियामक संस्था बनाने व एससी,एसटी एवं कमजोर वर्गों के लिए बैंकों के जरिए संचालित सरकार की योजनाओं के प्रखंड तथा पंचायत स्तर की उपलब्धियों के आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग की है।
श्री मोदी ने अपने पत्र में लिखा है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति लाख आबादी पर 12.52 की जगह बिहार में मात्र 7.07 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 4.01 बैंक की शाखाएं हैं। इसी प्रकार एटीएम की उपलब्धता भी प्रति लाख आबादी पर राष्ट्रीय औसत 18.31 की तुलना में बिहार में मात्र 7.43 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में महज 1.42 है। गौरतलब है कि बिहार की 88.71 प्रतिशत आबादी 8400 ग्राम पंचायतों में रहती है। राज्य की 5000 ग्राम पंचायतों में स्थायी बैंक शाखाएं नहीं है जबकि 15 प्रतिशत से अधिक पंचायतों में तो बैंकिंग काॅरेसपोंडेट की सुविधा भी नहीं है।
उन्होंने कहा है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं कराता है। बिहार के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अधिक से अधिक एटीएम सुविधा की जरूरत है। दूसरी ओर त्योहार के मौसम में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के एटीएम में नगदी नहीं रहने से लोगों को काफी असुविधा होती है।
बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग काॅरेसपोंडेंट के जरिए उपलब्ध कराई जा रही सेवा बहुत प्रभावकारी नहीं है। वहां पासबुक पिं्रटिंग की कोई व्यवस्था नहीं रहने से उपभोक्ता अपने लेन-देन का कोई रिकार्ड नहीं रख पाते हैं। बीसी द्वारा थर्मल पेपर पर दिया जाने वाला पिं्रटआउट टिकाऊ नहीं होता है ऐसे में किसी विवाद की स्थिति में ग्रामीण उपभोक्ताओं के पास कोई प्रमाण नहीं होता है। बीसी माॅडल के कार्यों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नियामक संस्था बनाने की जरूरत है।
उन्होंने लिखा है कि राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा एससी, एसटी व कमजोर वर्गों के लिए बैंकों के जरिए संचालित योजनाओं का कोई आंकड़ा बैंक तैयार नहीं करते हैं। इसी प्रकार राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में राज्य व जिला स्तर के डेटा तो उपलब्ध कराते हैं मगर प्रखंड व पंचायत स्तर के आंकड़ों के अभाव में जमीनी स्तर पर उपलब्धियों की प्रभावकारी समीक्षा संभव नहीं हो पाती है।
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स्वयं सहायता समूह को 7 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज और सभी सदस्यों को मिले 10 हजार ओडी की सुविधा
Date : 2020-01-28
आम बजट से पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिख कर उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार में जीविका के तहत संचालित स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की कर्ज सीमा विभिन्न चरणों में 1 से 5 लाख से बढ़ा कर 3 से 10 लाख करने, समूह के सभी सदस्यों को 10 हजार रुपये की ओवरड्राफ्ट (उघार) की सुविधा बैंको द्वारा देने, राज्य के सभी जिलों में समूह के सदस्यों को 6 से 7 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने और समय पर कर्ज की किस्त चुकाने वालों को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान देने, रिवाॅल्विंग फंड की सीमा 15 हजार से बढ़ा कर 50 करने व डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए सभी समूह को कम्प्यूटर, टैबलेट, प्रिंटर व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसी प्रकार एसएचजी को बिहार के 17 पिछड़े जिलों में तो 6 से 7 प्रतिशत ब्याज पर मगर शेष 21 जिलों में 10 से 12 प्रतिशत के समान्य ब्याज दर पर कर्ज दिया जाता है। सभी जिलों में 6 से 7 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने की व्यवस्था के साथ ही समय पर कर्ज की किस्त का भुगतान करने वालों को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान देने की मांग भी उन्होंने की है।
श्री मोदी ने कहा कि एसएचजी वित्त पोषण को बढ़ाने के लिए ‘वोमेन इम्पाॅवरमेंट इन्टरपेन्योरशिप फंड बनाने की जरूरत है ताकि बैंक इसके जरिए अधिक से अधिक समूह को पर्याप्त कर्ज दे सके। इसके साथ ही रिवाॅल्विंग फंड की सीमा 15 हजार से बढ़ा कर 50 हजार किया जाए जिससे समूह अपने सदस्यों को अधिक से अधिक मदद कर सकें। स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को परिवार के किसी एक सदस्य की जगह सभी सदस्यों को 10-10 हजार रुपये का बैंक ओवरड्राफ्ट की सुविधा दें।
श्री मोदी ने कहा है कि बिहार में जीविका के तहत 8 लाख से ज्याद स्वयं सहायता समूह के अन्तर्गत करीब एक करोड़ ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं जिनकी कर्ज वापसी की दर 98.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल एक से चार चरणों में आरआरबी सहित अन्य बैंकिंग संस्थाओं की ओर से समूह को 1 से 5 लाख रुपये तक का ही कर्ज मुहैय्या कराया जाता है, जिसे बढ़ा कर 3, 6, 8 और 10 लाख करने की जरूरत है।
उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री को सुझाव दिया है कि सरकार के ‘डिजी ग्राम’अभियान को सफल बनाने के लिए एसएचजी को कम्प्यूटर, टैबलेट, प्रिंटर व अन्य संसाधन उपलब्ध कराया जाए। इससे जहां वे सफलता पूर्वक वित्तीय लेन-देन करेंगे वहीं कृषि उत्पादकता व बाजार से जुड़ी जानकारियों से भी सम्पन्न होंगे। इन कतिपय पहल से ग्रामीणों की आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी।
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गया,राजगीर,नवादा में पाइपलाइन के जरिए पहुंचेगी गंगा
Date : 2020-01-27
बिहार के सारण जिला से सटे उत्तर प्रदेश के बलिया अन्तर्गत दूबेछपरा में नमामि गंगे के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित 5 दिवसीय ‘गंगा यात्रा’ के शुभारंभ के मौके पर वहां की राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल के साथ मां गंगा की आरती-पूजन के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार सरकार 2,836 करोड़ की लागत से 190 किमी पाइप लाइन के जरिए पेयजल के लिए गंगा का पानी गया, बोधगया व राजगीर तथा दूसरे चरण में नवादा तक पहुंचायेगी। जून, 2021 तक इस परियोजना को पूर्ण करने का लक्ष्य है।
श्री मोदी ने कहा कि ‘नमामि गंगे’ का लक्ष्य अब केवल गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाना ही नहीं बल्कि ‘अर्थ गंगा’ की ओर कदम बढ़ाना है ताकि गंगा किनारे की पंचायतों की अर्थव्यवस्था को गंगा पर आधारित कर मजबूत बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने नमामि गंगा के तहत बिहार के लिए 5,858 करोड़ की 52 परियोजनाओं की स्वीकृति दी है। इनमें से देश के किसी एक शहर में सर्वाधिक पटना के लिए 3,586 करोड़ की लागत से एसटीपी (सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) और उसके नेटवर्क की 30 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा 61.26 करोड़ खर्च कर बिहार में गंगा किनारे के गांवों में 7.32 लाख पौधे लगाए गए हैं। गंगा किनारे के गांवों के सभी घरों में शौचालय निर्माण के साथ ही वहां जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से होने वाले प्रदूषण से गंगा को बचाया जा सके।
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