पटना  23.04.2017

जब मुख्यमंत्री में कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है तो कुछ माह बाद सेवानिवृत्त होने वाले बेचारे मुख्यसचिव की क्या हैसियत कि वे लालू प्रसाद के मंत्री बेटों को मिट्टी घोटाले के आरोप में दोषी करार दें। मुख्यमंत्री में अगर हिम्मत है तो मिट्टी घोटाले की फाइल सार्वजनिक कर सर्वदलीय समिति से जांच कराएं। चारा घोटाले के दौरान भी लालू प्रसाद ने अधिकारियों से जांच करवा कर क्लीन चिट ले लिया था मगर बाद में लालू प्रसाद समेत कई अधिकारियों को जेल की हवा खानी पड़ी थी। 

पहले मुख्यसचिव ने कहा कि केवल संचिका मंगाई है कोई जांच का आदेश नहीं दिया है। जब जांच हुई ही नही ंतो फिर लालू प्रसाद को क्लीन चिट कैसे दे दिया ? शुरू में 90 लाख की योजना की बात कही गई, फिर जू के निदेशक ने कहा कि पाथवे बनाने के लिए 44 लाख की मिट्टी खरीदी गई है। अब मुख्यसचिव पलट कर कह रहे हैं कि 9 लाख की मिट्टी काटे गए पेड़ों की खाली जगह को भरने के लिए खरीदी गई है। तो जू में जो पाथ-वे बना उसके लिए मिट्टी किस योजना व कहां से लाई गई?

सरकार बतायें कि जिस एम एस इंटरप्राइजेज को मिट्टी कटाई-ढुलाई का काम दिया गया उसके लिए टेंडर कब निकाला गया था? टेंडर किस अखबार में छपा था और किन लोगों की कमिटी ने टेंडर स्वीकृत किया? क्या लालू प्रसाद के 700 करोड़ की लागत से बन रहे मॉल और जू की मिट्टी की जांच कराई गई? 

दरअसल अब यह घोटाला केवल मिट्टी का नहीं बल्कि अरबों-खरबों के मॉल और जमीन का है। नीतीश कुमार में अगर हिम्मत है तो एसआईटी या सर्वदलीय समिति से इस पूरे मामले की जांच कराएं।